भूकंप आया तो क्या होगा? आग लगी तो कितनी देर में पहुंचेगी मदद… लखीमपुर में सातों तहसीलों में हुई आपदा से निपटने की ‘रियल टाइम’ परीक्षा
लखीमपुर-खीरी, सोचिए… अचानक धरती कांपने लगे, किसी स्कूल की छत भरभराकर गिर जाए, अस्पताल में मरीज फंस जाएं या किसी बहुमंजिला इमारत और मॉल में आग की लपटें उठने लगें।

भूकंप आया तो क्या होगा? आग लगी तो कितनी देर में पहुंचेगी मदद… लखीमपुर में सातों तहसीलों में हुई आपदा से निपटने की ‘रियल टाइम’ परीक्षा
लखीमपुर-खीरी,
सोचिए… अचानक धरती कांपने लगे, किसी स्कूल की छत भरभराकर गिर जाए, अस्पताल में मरीज फंस जाएं या किसी बहुमंजिला इमारत और मॉल में आग की लपटें उठने लगें। ऐसे हालात में प्रशासन कितनी जल्दी हरकत में आएगा? पुलिस, दमकल और स्वास्थ्य विभाग की टीमें कितनी देर में मौके पर पहुंचेंगी? घायलों को कितनी तेजी से बाहर निकाला जाएगा?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए शुक्रवार को लखीमपुर-खीरी की सातों तहसीलों में एक साथ मॉकड्रिल कराई गई। सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक चले इस अभ्यास में आपदा की ऐसी तस्वीर तैयार की गई, मानो जिले में सचमुच भूकंप, आग या औद्योगिक-रासायनिक हादसा हो गया हो।
कहीं गिरी स्कूल की छत, कहीं अस्पताल में फंसे मरीज
लखीमपुर तहसील में राजकीय इंटर कॉलेज की छत गिरने का परिदृश्य बनाया गया। सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू शुरू किया।
निघासन और मितौली में भूकंप से अस्पताल को नुकसान और मरीजों के फंसने की स्थिति बनाई गई। टीमों ने अस्पताल में फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने और तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का अभ्यास किया।
वहीं मोहम्मदी, धौरहरा, गोला और पलिया में आग लगने के अलग-अलग दृश्य तैयार किए गए। कहीं स्कूल तो कहीं बहुमंजिला इमारत और शॉपिंग मॉल में आग लगने की सूचना दी गई। इसके बाद दमकल, पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं और आग में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
सिर्फ रेस्क्यू नहीं, हर सेकेंड का हुआ हिसाब
मॉकड्रिल में केवल बचाव कार्य ही नहीं देखा गया, बल्कि सूचना मिलने से लेकर टीम के मौके पर पहुंचने, रेस्क्यू, घायलों को अस्पताल पहुंचाने और सुरक्षित निकासी तक पूरी प्रक्रिया को परखा गया।
इन्सिडेंट रिस्पांस सिस्टम यानी IRS को सक्रिय रखा गया। जिला और तहसील स्तर की टीमों के बीच तालमेल और रिस्पांस टाइम की भी परीक्षा हुई। आपात स्थिति में 20 बेड का फील्ड अस्पताल और चिकित्सा कैंप स्थापित करने की व्यवस्था भी परखी गई।
डीएम ने खुद लिया व्यवस्थाओं का जायजा
मॉकड्रिल के दौरान डीएम अंजनी कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस, दमकल और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अभ्यास में सक्रिय रहीं।
एसएसबी की विभिन्न बटालियनों के डिप्टी कमांडेंट, जिला युवा कल्याण अधिकारी और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने ऑब्जर्वर के तौर पर पूरी कवायद को देखा।
डीएम बोले—कमियां सामने आएंगी, तभी होंगी दूर
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि मॉकड्रिल का मकसद आपदा के समय राहत और बचाव तंत्र की वास्तविक क्षमता को परखना है। सूचना मिलने के बाद टीमें कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती हैं और घायलों को कितनी तेजी से सुरक्षित निकालकर इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है, इसका आकलन किया गया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास से आपात स्थिति में सामने आने वाली कमियों की पहचान होती है, ताकि उन्हें समय रहते दूर कर आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।



